इश रात की तन्हाई के सब रंग बदल गएँ हैं.
चाँद निकला है वैसे हि, अँधेरे बदल गएँ हैं.
जिनके भरोसे थीं खुशियाँ, वो बदल गएँ हैं.
मंजिल तो अब भी वही है, कुछ रस्ते बदल गएँ हैं.
जिनपे किया भरोसा हमने, वो दोस्त बदल गएँ हैं.
जो बने थे कभी हमसफ़र, आज वो दुनिया हि छोड़ हैं.
इश टूटे हुए दिल के सारे , जज्बात बदल गएँ हैं.
ना बदले कभी हम, ना बदले हमारे ख्यालात.
बस रोना है यही .....
कुछ लोग बदल गएँ हैं...........
"MANN"
No comments:
Post a Comment